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नज़र को तेरी दिया नज़र कर सुकून रुह ,का करार अपना .

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Hindi Poetry

 नज़र को तेरी दिया नज़र  कर सुकून रुह का करार अपना .

न ज़िन्दगी ये थी यूँ भी अपनी नफस नफ़स था उधार अपना .
बिना तेरे कब हुईं मुक़म्मल ये आरजूयें, ये जुस्तज़ूयें,
ऐ काश समझे जो तू तमन्ना औ’ बख्श थोडा सा प्यार अपना .
हैं राह तकती मलूल आँखें कोई तो आये दिलासा देने,
मिले मुसलसल हैं गम अगर ये, कोई तो हो गमगुसार अपना .
न नग्मे बुलबुल के हैं चमन में न खुशबुओं के कहीं हैं रेले,
कहाँ न जाने है भूल आई, वो रेंज मस्ती बहार अपना .
तुम्ही चले तो थे दिल लगाने,लगीं न आँखें हुए ज़माने,
न दिल्लगी थी लगी ये दिल की,हुआ दिल आखिर फ़िगार अपना .  
 
 

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