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“प्राण”

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Hindi Poetry, Uncategorized

(आज प्राण साहब हमारे बीच नहीं रहे…लेकिन उनकी यादें एवं फ़िल्में हमारे बीच हमेशा रहेंगी…उनको श्रद्धापूर्वक आदरांजलि…)

“प्राण”

निज प्राण को गँवाकर अब रहे नहीं हैं आप…
मगर जब तक रहे तो थे सभी के बाप…
अभिनय में आपका कोई था नहीं जवाब…
दिलदार भी थे बड़े, थे हर डाइरेक्टर का ख़्वाब…

टक्कर दे पाना आपको था बड़ा ही हार्ड…
इसीलिए तो जीते आपने कई बड़े अवॉर्ड…
350 से भी ज़्यादा फ़िल्मो की रहे शान…
काम भी किया तो लगा दी ख़ुद की जान…
फ़िल्में चलाने के लिए लिखा जाता था “एंड प्राण”…

आप जैसा अब कोई भी कहाँ मिलेगा?
गुलिस्ताँ-ए-हिन्दुस्तान में क्या ऐसा गुल खिलेगा?
सुना है मगर हमने है उम्मीद पे क़ायम जहाँ…
लौट आना प्राण तुम, इक बार फिर यहाँ…
लौट आना प्राण तुम, इक बार फिर यहाँ…

-प्रवीणPran

4 Comments

  1. Vishvnand says:

    Sahraday sundar shradhdhanjali
    Bahut manbhaayii
    Pran sahab ki amar atma ko Bhagvaan swarg me shanti pradaan karen…

    Saalon Villain kaa Kirdaar ada karte hue bhii jis vyakti ne sab kaa itanaa pyaar paayaa
    Aisii anany Pran sahab kii personality thee jisne ant tak sab ke man ko jeet lubhaayaa
    Dhany the Pran sahab ….!

    • P4PoetryP4Praveen says:

      Thanks a lot for your appreciation Dada…Jiska naam hi Pran ho, wo kaise mar sakta hai? 🙂

  2. prano me hunkaar bhar kar prano me aashaa sanjoye
    praan ji ne praan khoye praan ki yaado me roye

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