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“कर डालो ख़ुद को जय…”

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Hindi Poetry, Uncategorized

इस विचित्र संसार में, मित्र बन गये हैं चित्र…
भावनाएँ होने लगीं बयाँ बेजान, मूर्ख मशीनों पर…
मिलना है होता अब अपने ही घरों में कुर्सी पर…
तकनीक ने कर ली है देखो कितनी तरक़्क़ी…
सिर्फ़ एक मैसेज से पूछ लेते हैं हालत सबकी…

भाव भी होने लगे अभिव्यक्त इमोटीकॉन से…
इश्क़ भी लड़ने लगे अब तो सेलफॉन से…
सभी खेल हैं फिक्स हर एक ज़ॉन से…
नाड़ा ना खुले ख़ुद का तो गूगल करो जनाब…
मिल जाएँगे आपको सारे वहीं जवाब…

टच-स्क्रीन से होता है अब तो चरण-स्पर्श…
देख-देखकर बस फ़ेसबुक हो जाता है हर्ष…
हैं खुल गयीं दुकान भी अब तो ऑनलाइन…
नहीं है अब ज़रूरत कहीं बनाने की लाइन…

इस माध्यम से खुद को अभिव्यक्त तो करो…
मगर अपने बच्चों पर क़ानून सख़्त करो…
इंटरनेट का जादू-मंतर है भयंकर…
ना बच सका इसके बुखार से कोई भी नारी-नर…

झाँको बाहर…इंतज़ार कर रहा है ये संसार…
सीमित करो सिटिंग, ना बनो यूँ तुम बीमार…
खाओ हवा ताज़ी…जो क़ुद्रत ने दी तुम्हे…
खाओ क़सम आज ही, कर डालो ख़ुद को जय…

खाओ क़सम आज ही, कर डालो ख़ुद को जय…

4 Comments

  1. SN says:

    timely advice but alas falling on deaf ears.

  2. Vishvnand says:

    bahut khuub; badhiyaa rachanaa aur gahan arthpoorn
    Hardik badhaaii

    Khud kii jay khud ko haraakar hi milatii hai
    par badii kathin hai kyuunki khud kii haar hamse n jaatii sahii hai… 🙂

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