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“हो गए…”

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Hindi Poetry, Uncategorized

धूप में चल-चलकर हम काले हो गए…
पाँव में भी देखो कैसे छाले हो गए…
320194_10150323644011783_1967569147_nघर में हमारे अब तो जाले हो गए…
गीत अब दर्द भरे नाले हो गए…
बावफ़ा अब बेवफ़ा साले हो गए…
अपने ही वतन से निकाले हो गए…
बरसों अब होश संभाले हो गए…
महीनों इन कपड़ों को डाले हो गए…
जान के भी अब तो लाले हो गए…
अमृत भी विष के प्याले हो गये…
नदी और तालाब तो नाले हो गए…
धर्म-मज़हब जी के जंजाले हो गए…
धूप में चल-चलकर हम काले हो गए…

2 Comments

  1. Vishvnand says:

    Vaah, bahut khuub
    Ye sab huaa bhii hai to kyaa
    Ham dilwaale to ye sab sahkar ab aur bhii dilwaale ho gaye …. 🙂

    • P4PoetryP4Praveen says:

      Thanks a lot dada…bahut antaral k bad aapse mukhatib hoon…

      Aur aap ki is ada k ham divaane ho gaye… 🙂

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