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“जीवन”

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Hindi Poetry, Uncategorized

आज फिर बरसों बाद लौट आया हूँ उन्हीं गलियों में…
होने रुसवा या शायद मिलने किसी अपने को…
सोचा न था कि वक़्त को इस क़दर उलट सकूँगा…
पता नहीं कहीं वक़्त ही ना उलट दे मुझे…

लेकिन डर-डर के भी आख़िर जीऊँगा कब तक?
संघर्ष है करना हैं चल रहीं साँसें जब तक…
हो ही जाने दो आज इन क़दमों की आहट वहाँ…
रोज़ का आना-जाना हुआ करता था कभी जहाँ…

दे ही देता हूँ चलो दस्तक उन बंद दरवाज़ों पर…
हो सकता है आज खुल जायें, जो ना खुले तब…

सुख का दुख से, दर्द का ख़ुशी से गहरा नाता है…
ऐसे ही तो यह जीवन जिया जाता है…297351_10150323614481783_1428273906_n

6 Comments

  1. Vishvnand says:

    वाह वाह बहुत खूब
    “सुख का दुख से, दर्द का ख़ुशी से गहरा नाता है”
    सुख दुःख दर्द और ख़ुशी से ही उभरता मन का कविता से प्यारा नाता है
    और फिर सुकोमल अनुभूति लिए जन्म लेती बार बार अलग अलग सी ऐसी ही सुन्दर कविता है …..

    बहुत मन भायी, हार्दिक बधाई

    • P4PoetryP4Praveen says:

      लेकिन P4P पर…किसी भी कविता का आपके कमेंट से गहरा नाता है…पढ़कर मज़ा आ जाता है… 🙂

  2. Prem Kumar Shriwastav says:

    Sunder Rachana.

    • P4PoetryP4Praveen says:

      आपके सुंदर से कमेंट के लिए धन्यवाद… 🙂

  3. बहुत सुन्दर कविता है|
    बधाई

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