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लफ्जों से लेता खेल जो तू,ले खुद को न तुलसी सूर समझ.

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Hindi Poetry

तू दुनिया का दस्तूर समझ

मतलब की बात ज़रूर समझ.

 

जो काम न आता हो तेरे

उसको रखना है दूर,समझ.

 

इज़हारे मुहब्बत ठीक नहीं

सब लें  न तुझे मजबूर समझ.

 

सबसे न उमीदे उल्फत रख

सब इसको रहे फितूर समझ .

 

दिखला न सभी को ज़ख्मे जिगर,

सब लें न इसे नासूर समझ .

 

कर रक्स बरहना बदन अगर 

चाहे होना मशहूर समझ .

 

तू सह न सितम यूँ लब सीकर,

सब लेंगे तुझे मंज़ूर समझ .

 

लफ्जों से लेता खेल जो तू,

ले खुद को न तुलसी सूर समझ.  

 

2 Comments

  1. sushil sarna says:

    aik sahaj,sundr,aur aantrik bhaavon se ot prot gazal, meree tumhaaree hm sabkee gazal-badhaaee badhaaee badhaaee aapko Singh saahib

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