« »

महुए पे मादक फुल रहे ,ढोलक मांदल से सूर बहे

1 vote, average: 4.00 out of 51 vote, average: 4.00 out of 51 vote, average: 4.00 out of 51 vote, average: 4.00 out of 51 vote, average: 4.00 out of 5
Loading...
Crowned Poem, Hindi Poetry

यह कंठ वेदना लिख रहा, जीवन बाधा से सीख रहा
ह्रदय का अंतर चींख रहा ,क्रोधित मन मुठ्ठी भींच रहा

होली रंगों से खेल रही ,ईर्ष्या नफ़रत की बेल रही
माता ममता उड़ेल रही ,सखीया अंखिया से खेल रही
आँचल ने पोंछे है आंसू ,अनुभव आयु से जीत रहा

लहरों में होती है हल चल लहराती है बल खाती है
वह नृत्य करे करती नखरे, तट से आकर टकराती है
तट पे आकर मन से गाकर,करुणा का लिखता गीत रहा

महुए पे मादक फुल रहे ,ढोलक मांदल से सूर बहे
साँसों में बसती हो सजनी रंगों में सब मशगुल रहे
घूमता फिरता पूनम चन्दा मन के आँगन से दिख रहा

2 Comments

  1. Vishvnand says:

    Sundar bhaavpoorn rachanaa
    Man bahut bhaayii
    badhaaii

Leave a Reply