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दीवाली होली तुम बिन दिल की सूनी रह आए

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रानी जतन करो ऐसा मिलना तुमसे हो पाए

मन न लगे तुम बिन मेरा कुछ भी मुझको न सुहाए

रची इबारत दिल की पल पल काश कभी पढ़ पातीं

बरजी चुप रखतीं कैसे दिल काश मुझे सिखलातीं

 

तुम प्राणों में बसीं नयन छबि प्यारी आती झूली

बसीं धड़कनों में तुम छबि नयनों में रहती झूली

मन से मन का भेद न रंच कहो फिर कैसे भूलीं

भूला मैं न तुम्हें रानी प्यारी तुम कैसे भूलीं

 

वे दिन वे पल साथ दिलों का यादों में लिपटाए

दीवाली होली तुम बिन दिल की सूनी रह आए

फीके रंग अन्धेरा तुम बिन मन झुरसा रह आए

दीप जलें कैसे मुख मल रंग अंग किसे लिपटाए

 

रंग गए जीवन के तुम संग फागुन सदा जराए

कौन रूठ इठलाये लिसको कौन मना रह आये

नेह भरा मन दीप मगर बाती बिन रहा अधूरा

अंधेरों में आह भरा रानी तुम बिन रह झूरा  

 

तन मन प्राण दिये इक दूजे तुम रीतीं मैं सूना

शेष रही यादों के संग दिल और बढ़े दुःख दूना

कसमकस भरी दुनिया में बस कुछ पल ऐसे आएं

सुख के मोती सच्चे जिनमें भूले नहीं भुलाएं

 

भरे आह दिल हम तुम दो आओ वे मोती चुन लें

बसे ख्वाब जिनमें रानी आओ मिल सच कर बुन लें

रानीप्रिया पवित्रा तुम बिन मन न मनाया माने

हठ कर बैठा दिये प्राण भी प्यारी तुमको पाने

 

जनम लगें चाहे जितने आँखें तक राह रहेंगी

चिबुक थाम मुखड़ा प्यारा तेरा तकने तरसेंगी

धुन्धुआता मन आह भरा प्यारी तुमसे मिलने को

हुईं दूर बेबस तुम चैन न तुम बिन रानी दिल को   

 

– पवित्रप्रेम      

 

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