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कहीं बचे भी अगर, करेंगे त्राहि त्राहि प्रहलाद।

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Hindi Poetry

सच है क्या,कहते सभी हर होली के बाद।

जल जाती है होलिका,बच जाता प्रहलाद।

बच  जाता प्रह्लाद न ये विश्वास  रहा हो।

बची राक्षसी वृत्ति रही,आभास रहा हो।

कहीं पाशविक जुल्म,कहीं है सत्ता का उन्माद।

कहीं बचे भी अगर, करेंगे त्राहि त्राहि प्रहलाद।

2 Comments

  1. prahlaad man kaa vishvaas hai
    prahlaad jeevan aanhaad hai
    isliye prahlaad kabi nahi martaa
    mar jaate bure sapne

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