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होली

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Hindi Poetry


रंगों का त्यौहार आया
प्यार की लगा दो बोली
छोड़ो अपनी परेशानियाँ
आओ मिलके खेलें होली

भूल जाओ, ये तेरा ये मेरा
सुख दुःख की आँख मिचोली
उल्हास से लो लम्बी सांस
आओ मिलके खेलें होली

नफरत को पीछे छोड़ो
जात पात से झटको झोली
एक ही खून है रगों मे
आओ मिलके खेलें होली

मिल जुल कर तस्वीर बनाओ
नाच गाने की निकली टोली
खुशहाली बिखरे हर दिन
आओ मिलके खेलें होली

अब हर पल जशन मनाओ
जैसे निकले सुहागन की डोली
कुछ सांसों की है ये ज़िन्दगी
आओ मिलके खेलें होली

रंग बिरंगी है दुनिया
सबसे सुन्दर जीवन की रंगोली
उमंग से कुदरत झूमे
आओ मिलके खेलें होली

4 Comments

  1. Sudha says:

    perfect poem and describes how we should be living our lives without all the grudges and hatred for each other…I wish we would all follow what it says and make life beautiful full of color and happiness.

  2. sakraatmak soch ko pratibimbit karti rachanaa
    holi ki shubh kaamnaaye

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