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मेरी डायरी के पन्ने…

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Hindi Poetry

मै आज फिर

अपनी डायरी के पन्नें पलट रहा था

शायद वो पन्ना खोजने की

कोशिश कर रहा था

जिसमें मैं अक्सर

कुछ लिखने से पहले

इक नाम लिख दिया करता था

और फिर तुरंत

मिटा दिया करता था

के कहीं कोइ देख न ले

और फिर उसके बाद

कभी कुछ लिख नही पाया

शायद इसीलिए

मेरी डायरी के सारे पन्नें

आज भी कोरे हैं…

One Comment

  1. SN says:

    kya pencil se hi karte the indaraaz,kya ghis nahin gaya kaagaz ka tukda janaab.

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