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***आंसुओं के साथ बहाना होगा ………..***

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Hindi Poetry

आंसुओं के साथ बहाना होगा ………..

 

अपने अपने दंभों को समेटे …

हम इक दूसरे  की तरफ …..

पीठ करके चल दिए //

बिना इसका अनुमान लगाये कि …

मुंह मोड़ के हम ….

उन स्नेहिल पलों का ….

अनजाने में क़त्ल कर रहे हैं //

जो हमने …

तारों की छाँव में …

चांदनी की बाहों में …

नशीली निगाहों में …

इक दूसरे के कन्धों पे ….

सिर रख कर …..

इक दूसरे की उँगलियों में …..

उंगलियाँ डालकर …..

इक दूसरे के केशों से खेलते हुए ….

निशा में अपने अस्तित्व को …..

इक दूसरे में विलीन करके …..

संजोये थे //

और हाँ …

सागर की रेत् पर पाँव के निशाँ ….

रतजगों से बिस्तर पर वो सलवटों के निशाँ ….

मुहब्बत के उन्मादी पलों की ….

वो महकती दास्ताँ …..

 क्या मात्र पीठ मोड़ के चल देने से ….

हम अपनी स्मृति से ….

विस्मृत कर पायेंगे ?

नहीं, प्रिय नहीं …

ये इतना आसाँ नहीं है //

हमें मुड़ के इक दूसरे  की तरफ ….

लौट के आना होगा //

बिना किसी शर्त के ….

इक दूसरे को अपनाना होगा //

अपने दंभ को …

पछतावे के ….

आंसुओं के साथ बहाना होगा // 

बहाना होगा ……..

 

सुशील सरना / 21.03.2013

 

 

 

 

 

 

 

 

 

6 Comments

  1. Prem Kumar Shriwastav says:

    Bahut sundar kavita…Kash aisa har koi kare…Apne aham ko chodkar apne pyaar ki taraf bade…

  2. s.n singh says:

    khoobsurat andaaz.

  3. Vishvnand says:

    vaah vaah ati sundar
    aandaaze bayaan bahut man bhaayaa
    agar aisaa ho to phir kyaa baat hai
    saaraa jeevan svarg ke sukh saa suhaanaa hogaa

    rachanaa ke liye hardik badhaaii

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