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***तमाम शब् उनकी नजरें …***
| Hindi Poetry |
तमाम शब् उनकी नजरें …
तमाम शब् उनकी नजरें .बदमाशियां करती रहीं ,
बेहिजाब करने की हमको गुस्ताखियाँ करती रहीं ,
आगोश से उनकी नज़र से .. कैसे बचते हम भला ,
उनकी साँसों से ये सांसें …सरगोशियाँ करती रही।।
सुशील सरना



vaah vaah kyaa baat hai
ye to badmaashi aur gustaakhi ke khayaalon kii sargoshii hai ….
Thanks a lot R.V.anand jee for ur so sweet comment
Bahut khoob.
shukriya Raj jee is madhur prashansa ka