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नारी शक्ति

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Hindi Poetry

नारी शक्ति

सागर से ज्यादा गहरा मन है,
फूलों से ज्यादा कोमल तन है.
हँस-हँस कर पीडा सह सकती है,
चुनौतियों से नहिं डरती है.
त्याग प्रेम की ईंट जोडकर,
घर की नींव सुदृढ़ बनाती,
अविश्वास-तानों की सेज को,
श्रृद्धा के फूलों से सजाती.
कभी प्रेमिका राधिका जैसी,
तो कभी समर्पिता मीरा जैसी,
हर युग में इतिहास रचा है,
बन मैत्रेयी गार्गी या शबरी.
सुना होगा सबने कि इसके,
आँचल में है और दूध आँखों में पानी.
जन्म दे सकती है तो ले भी सकती है,
बन झांसी की रानी.
पीड़ित दुखी अभिशापित जन ने,
जब-जब इसे पुकारा,
सीने से इसके बहने लगती है,
ममता, दया, करुणा की धारा.
कस्तूरी मृग सी अनजान है,
शक्तिशालिनी नारी खुद से,
निष्काम भाव से कर्म करे,
जन्मी है इस सृष्टि पर जब से.
वसुंधरा सी क्षमाशील है,
पर कमजोर नहीं इक पल को,
दुर्गा बन जाती है नारी,
यदि सताओगे, रुलाओगे इसको…….

सुधा गोयल ‘नवीन’
09334040697

9 Comments

  1. SN says:

    sundar chitran

  2. Vishvnand says:

    ati sundar arthpoorn aur manbhaavan
    bahut bhaayii ye rachanaa gahan
    hardik abhivaadan

  3. नारी के है कई रूप कही छाँव है तो कही धूप
    नारी कही मर्यादा है नारी का रूप कही मीरा है
    उसका जीवन सीधा -साधा है
    तो बनी कही गोकुल की छोरी है कान्हा की राधा है

  4. parminder says:

    bahut sundar aur sahee!

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