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———–कहाँ बदला है जमाना ——–

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Hindi Poetry

लोग कहते है जमाना बदल रहा है /
वो रामदीन ,
आज भी शोषित है हीन,
पेट उसका भूख की आंच से ,
घर उसका गरीबी की आग से ,
जल रहा है /
फिर कैसे ,लोग कहते है जमाना बदल रहा है /
खत्म होते नही देखा मैंने सफर उनका ,
सहारा लेकर खत्म कर गये कई सफर जिनका/
वो कुली आज भी बोझ ढोंते है /
कल भी चलता था ,
चल रहा है आज भी ,
सिलसिला पेट भरने का ,
अंत नही हुआ है फसलों के कटने का ,
कल की तरह किसान आज भी बोते है /
यू न इंतजार कर तपती धूप मे ,
आराम अब तलक महलो मे पल रहा है /
फिर कैसे लोग कहते है जमाना बदल रहा है /
जयचंद थे कल भी ,आज भी कोई कम नही ,
बिक जाए ईमान देश क्या ,उनको कोई गम नही /
कल भी बंटा था देश ,
पथ पर उसी फिर भारतीय चल रहा है /
फिर कैसे लोग कहते है जमाना बदल रहा है/

2 Comments

  1. s.n singh says:

    sahi farmate hain, raam deen to raam ne deen banaya hai use ham kaise badal pate hain?

  2. Narayan Singh Chouhan says:

    Thanks Singh sahb

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