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***न पड़े शरमाना …….***

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Anthology 2013 Entries, Hindi Poetry

एक बिंदु सा

अस्तित्व है मेरा

गिर जाऊं तो ….

मिट्टी में विलुप्त होना ….

निश्चित है मेरा //

बिंदु ..

आदि है //

बिंदु ..

अनंत है //

बिंदु हर रेखा का …

आरम्भ है तो …

बिंदु ही  …

हर रेखा का अंत है //

इसकी शक्ति से ….

कोई अनभिज्ञ नहीं //

फिर भी ..

अपने अहम् के आगे ..

उसे गौण मानते हैं //

इस बिंदु में कहीं ….

प्रेम की लहरें हैं //

तो कहीं ..

प्रतिशोध की ज्वाला है //

देख दर्पण ..

मुझे ..

अपना प्रतिबिम्ब न दिखा //

मुझे किसी रूप के श्रृंगार का ..

अभियुक्त न बना //

जिस दिन मैं …

किसी अखबार की सुर्खी में …

जलता हुआ नज़र न आऊँ //

जिस दिन मैं …

किसी अलता लगे ….

पाँव वाले माथे का …..

गौरव बन जाऊं //

जिस दिन ….

मैं किसी …..

पौरुष अहम् का शिकार …..

होने से बच जाऊं //

जिस दिन ……

हर नज़र में ….

नारी के लिए ….

आदर भाव का  ….

नीर तैरता पाऊँ //

जिस दिन ….

दहेज़ की ज्वाला से ….

नारी को मुक्त पाऊँ ….

हाँ, उस दिन …

सच कहता हूँ ….

ऐ दर्पण …..

मैं बिंदु से बिंदिया ….

बन जाऊंगा //

नारी के …..

गौरवान्वित  माथे पर ….

अपने अस्तित्व की ….

पवित्र पहचान लिख जाऊंगा //

हाँ …..

तब ऐ दर्पण ….

नारी मस्तक पे …

स्वयं को सुशोभित ….

कर पाऊंगा //

तब ….

हाँ , तब ही …

तू मुझे मेरा …

प्रतिबिम्ब दिखाना //

ताकि …

फिर किसी बिंदिया को …..

न पड़े शरमाना ,न पड़े शरमाना …….

सुशील सरना /07/03/2013

6 Comments

  1. s.n singh says:

    sahi shabd guaravanvit hota hai.

    • sushil sarna says:

      Sir Thanks for pointing out the error, in fact this was typing error, which has now been corrected and resubmitted.

  2. mehar says:

    A very effective poem

  3. Vishvnand says:

    Rachanaa aur andaaze bayaan bahut man bhaayaa
    hardik badhaaii

    • sushil sarna says:

      Resp.Vishvnand jee aapkee is madhur prashansa ne rachna ko jo maan diya hai uske liye haardik aabhar SIR jee

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