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हमसे हनोज़ दूर ही दिल्ली सदा रही,

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बैठे थे तीरगी में कुछ ऐसे नसीब थे।

इतना  रहा   गुनाह  फ़क़त  हम गरीब थे।   teergi-darkness

 

हमसे हनोज़ दूर ही दिल्ली सदा रही,

कुछ लोग फायदे में रहे जो क़रीब थे।   hanoz-till now

 

छाया है वो सुक़ूत चमन में,यकीं न हो,

मस्ती में नगमा संज कभी अंदलीब थे।   nagma sanz-singing,andaleeb-bulbul

 

करते रहे इलाज़ मरज़ कुछ न कम हुआ,

बन खुद गए वो रोग,निराले तबीब थे।  tabeeb-doctor

 

अब क्या बताएं हम कि लुटे किस मुक़ाम पर,

रहते जहाँ तमाम हमारे हबीब थे।   habeeb-freinds

 

लेके सहारा झूठ का उनके महल बने,

हम सच के साथ थे हमें हासिल सलीब थे।

 

मुमकिन रहा न ये भी ज़रा आँख मूँद लें,

आये, लगी जो आँख तो सपने अजीब थे।

 

तहजीब का,अदब का किसी का न था लिहाज़,

क्या खूब अंजुमन थी,अजब ही अदीब थे।     adeeb-literteur

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