| « बीहड़। | THIS ACHE » |
तितलियाँ
| Uncategorized |
उड़ने दो ज़रा न करो परेशान तितलियाँ,
दे जायें न रो-रो के अपनी जान तितलियाँ।
हो रही बदरंग सी कुछ दिन से फ़िज़ायें,
कुछ अंधड़ों ने की कई हलकान तितलियाँ।
कुछ ख़ार खार खाये से रहते हैं हर तरफ़,
कमज़र्फ़ कर जायें लहूलुहान तितलियाँ।
तितलियोँ से ही तो है इस बाग की जीनत,
फ़ूलों को दे जायें नई पहचान तितलियाँ।
तस्सवुर -ए- बाग़ां करें इनके बगैर क्य़ा,
करती हैं हम सभी पर एहसान तितलियाँ।
जायें किसी भी बाग़ मे है कौम मुहब्बत,
चाहे करो हिन्दु या मुसलमान तितलियाँ।
चंदन तेरे लिए ये तितलियाँ है तितलियाँ,
सज़दे में हूँ मेरे लिए भगवान तितलियाँ।
-चंदन


Titalyaa anubhootiyaa smvednaaye
Titliyo ke roop me vedanaa sajaaye hai
dhanyavaad hausala afzAyee ke liye
vaah vaah kyaa baat hai
aapkii is sundar rachanaa ne jagaa diin
Man ke kone me soii huuinn kitnii saarii anjaan titliyaan
Rachanaa ke liye hardik abhivaadan ….
bahut bahut dhanyvAd is hausalA afzAyee ke liye sir