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***तुम ही आदि हो तुम ही अंत हो …..***

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Anthology 2013 Entries, Hindi Poetry

….तुम ही आदि हो तुम ही अंत हो …..

तुम ही आदि हो तुम ही अंत हो 
इस जीवन का तुम बसंत हो 

नयन आँगन का तुम मधुमास हो 
अतृप्त अधरों की तुम ही प्यास हो 
तुम ही सुधि हो मेरे मधु क्षणों की 
मेरे एकांत का तुम अवसाद हो 

नयन पनघट पे मिलन का पंथ हो 
इस जीवन का तुम ही बसंत हो …….

तुम ही हो जीवन की परिभाषा 
मिलन-ऋतु की तुम अभिलाषा 
भ्रमर आसक्ति का मधुर पुष्प तुम 
बिन दरस दृग तुम बिन प्यासा 

इस प्रेम विरह का तुम अंत हो 
इस जीवन का तुम ही बसंत हो …….

सुशील सरना /12/02/2013

6 Comments

  1. chandan says:

    तुम ही हो जीवन की परिभाषा
    मिलन-ऋतु की तुम अभिलाषा
    भ्रमर आसक्ति का मधुर पुष्प तुम
    बिन दरस दृग तुम बिन प्यासा

    …..अति सुन्दर

  2. sushil sarna says:

    thanks a lot for ur so nice appreciation Chandan jee

  3. kshipra786 says:

    bohot sundar .

  4. sushil sarna says:

    haardik aabhar is madhur prashansa ka kshipra786 jee

  5. santosh bhauwala says:

    तुम ही हो जीवन की परिभाषा
    मिलन-ऋतु की तुम अभिलाषा
    bahut sunder !! badhaai

  6. sushil sarna says:

    haardik aabhar Santosh Bhauwala jee aapkee is sweet pratikriya ka

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