« »

सबको वो ऊपरवाला ….! (भक्तिगीत)

1 vote, average: 4.00 out of 51 vote, average: 4.00 out of 51 vote, average: 4.00 out of 51 vote, average: 4.00 out of 51 vote, average: 4.00 out of 5
Loading ... Loading ...
Hindi Poetry, Podcast

 

सबको  वो  ऊपरवाला ….! (भक्तिगीत) 

सब को वो ऊपरवाला, सबकुछ देता है,
तू ही झोली खाली रखकर यूं ही रोता है……

इक खिड़की में मिले प्यार, दूजे में धन की लाइन बड़ी,
इक खिड़की से कार्य बटे, जिसमे है शक्ति जीवन की,
भ्रम में आकर वृत्ति ने तेरी, धन की खिड़की ना छोडी है.
सब को वो ऊपरवाला, सबकुछ देता है,
तू ही झोली खाली रखकर यूं ही रोता है……

सुर संगीत की लहरों की गहराई में सुख सागर है,
सुन्दरता वरदान सभी को, सृष्टि इतनी सुंदर है,
मूरख मन की बात अलग, वो अंधा होता है,
मूरख मन की बात अलग, वो बहरा होता है,
सब को वो ऊपरवाला, सबकुछ देता है,
तू ही झोली खाली रखकर यूं ही रोता है……

सबकुछ पाकर भी मानव को, सुख ना मिलता है,
मोह, क्रोध, और लोभ के फंदे में वो अटका है,
मिले यहाँ आनंद उसे जो सबकुछ खोता है,
सब कुछ खो, जो प्रभू प्रेम में अर्पित रहता है,
उसका मन आनंद में, प्यारे, डूबा रहता है ……
सब को वो ऊपरवाला, सबकुछ देता है,
तू ही झोली खाली रखकर यूं ही रोता है……

 

“ विश्वनंद ”

2 Comments

  1. sangeeta says:

    Bilkul sahi kaha hai aapne, Sir. Is gahan satya ko sabhi jaanate hain par maanata har koi nahin hai aur is par amal bhi kam hi log karte hain. “Moha-maaya, krodh aur lobh ke fande mein ” fanskar log asli sukh bhool jaate hain.

  2. kusum says:

    What shall it profit a man if he gain the whole world
    But lose his soul ?
    Kusum

Leave a Reply