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शान्ति और अशान्ति

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Hindi Poetry

शान्ति आत्मा का स्वभाव है
अशान्ति मे घ्रणा है अभाव है
शान्ति मे ऊर्जा है जोश है
अशान्ति मे आक्रोश है असन्तोष है

विश्व की महाशक्तिया पूर्णत शान्त है
दुर्बलताये दुखी ,अशान्त और आक्रांत है
शान्ति और मौन से शमन होते विकार है
शान्ति व्यक्ति पूर्ण रुपेण होता निर्विकार है

शान्ति मे अलौकिक परम सत्ता का वास है
अशान्ति मे है व्याकुलता का आभास है
सत्य और अहिंसा मे रही शान्ति है
झूठ और पाखंड मे समाहित भ्रान्ति है

चहु और छाया अशान्ति का साम्राज्य है
शान्ति मे सुशासन है रामराज्य है
शान्त व्यक्तित्व मे समाहित क्रष्ण बुद्ध और शिव है
शान्ति मे होता विकास शान्ति ही शक्ति की नींव है

इसलिये परिस्थितिया कितनी भी हो प्रतिकूल शांत रहो
अशांति के आक्रमण से विचलित न रहो
क्योकि शान्ति से निकल पाये सभी समाधान है
अशान्ति मे है मानसिक विचलन
अस्थिरता व्यवधान है
शांत रह कर विकट स्थितियो को सम्हालो
अशांति आशंकाए हो तो मन से निकालो
शांत रह कर सहज ही परमात्मा परम शक्ति को पा लो

2 Comments

  1. Vishvnand says:

    सुन्दर मनभावन रचना
    अर्थपूर्ण बहु शान्ति और अशांति पर यह अभिव्यक्ति है
    हमारी संस्कृति कहती देहबुद्धी अशांति और आत्मबुद्धि शांति का श्रोत है
    आज की पाश्च्यात ” दिल मांगे more चीजेँ ” वृत्ति अशांति की प्रवर्तक है .
    दुर्भाग्य हम पागलों की तरह बुरी बाते और अशांति अपनाते जा रहे हैं

    रचना के लिए हार्दिक अभिनन्दन

  2. siddhanathsingh says:

    jab ham abhavon ko zaroorat se zyada bhaav dene lagte hain ashnati tabhi udbhoot hoti hai.

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