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कई रिन्दों का वो मन रख रहे हैं,

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कई रिन्दों का वो मन रख रहे हैं,

सुराहीदार गर्दन रख रहे हैं।

 

न घटती दूरिये मंजिल अगरचे,

क़दम तो वो दनादन रख रहे हैं।

 

ह्रदय चाहे हलाहल से भरे हैं,

ललाटों पे तो चन्दन रख रहे हैं।

 

ज़रूरी था कि धनुरासन लगाते,

वो निस्पृह हो शवासन रख रहे हैं।

 

करी भरमार लो आश्वासनों की,

वो खासो आम का मन रख रहे हैं।

 

दिवस गणतंत्र का कल आ रहा है,

वो इक तैयार भाषण रख रहे हैं।

 

इधर बेटी गयी बिक मुफलिसी में,

प्रगति का वो प्रदर्शन रख रहे हैं।

4 Comments

  1. दिवस गणतंत्र का कल आ रहा है,

    वो इक तैयार भाषण रख रहे हैं।
    uprokt panktiyaa pransangik hai

  2. Vishvnand says:

    Vaah vaah Kyaa baat hai bahut badhiyaa
    rachanaa ki jitanii prashansaa karen hogii thodaa

    ab to hue vo bhrsht paagal kar kushaasan
    dimaag apanaa naa jagah par rakh rahe hain

    rachanaa ke liye bahut badhaaii

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