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नारे लगा के जोर से “भारत महान” लोग।
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नारे लगा के जोर से “भारत महान” लोग।
करने में देश का हैं लगे पिंड दान लोग।
इस फ़िक्र में कि मान कहीं लें बुरा न लोग।
बैठे हुए तमाम बने बेजुबान लोग।
क्या वक़्त आ गया है कहाँ जा रहे मेयार
दिल्ली में एक वक़्त थे रहते महान लोग।
हर चीज़ बिक रही है वो इस्मत हो या ज़मीर
बैठे हुए हैं कू ब कू खोले दुकान लोग।
संस्कृति न सभ्यता का कुछ अपनी रहा लिहाज़,
पश्चिम की धुन पे नाच रहे नौजवान लोग।
मासूम जिंदगानियां खापों में खप गयीं,
खूंख़ार हो रहे हैं दरिन्दे समान लोग।
वो आग जल रही है दिलों में अवाम के,
डर है कि देश ही ये कहीं दें जला न लोग।
सारा नफ़ा ज़मीन से ले कंपनी उडी,
और डूब डूब क़र्ज़ में मरते किसान लोग।
जिसके लगे जो हाथ वही लूटने में मस्त,
हरसू जुटे शिकार में बांधे मचान लोग।
ग़र मैं बुरा तो कौन सा तू दूध का धुला ,
ये कह के बच रहे हैं सभी हुक्मरान लोग।
टुकड़ों में बांटने में लगे हैं समाज को,
बर्फी समझ रहे हैं ज्यों हिन्दोस्तान लोग।

bahut badhiyaa
man bhaayii
jaise nahii hai raaj ko netaa milaa koii
moorakh hai ham le laaye aise phoren log
thanks.