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डाल रही हैं काला जादू ज्यों कजरारी नज़रें

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डाल रही हैं काला  जादू ज्यों कजरारी नज़रें

देख रही हैं मंत्रमुग्ध सी तुमको सारी  नज़रें।

 

खिंचे लाज के हैं आँखों में लाल सिंदूरी डोरे

हुईं सुहागिन देख पिया को कोरी क्वांरी नज़रें।

 

नज़रंदाज़ करो नज़रों का कहा ,भला जो चाहो,

अक्सर दे जाती हैं दिल को बस बीमारी नज़रें।

 

उसको लगता था दुनिया में मुझसा कोई न सुन्दर,

माँ ने सारा सारा बचपन रोज़ उतारीं नज़रें।

 

नज़र नज़र में अक्सर दिल का लेन  देन  हो जाता,

उल्फत के इस रोज़गार की पटु  व्यापारी नज़रें।

 

लौट के आये नहीं पिया तुम एक बार जो बिछुड़े

उमर उमर  भर राह तुम्हारी तक तक हारीं नज़रें।

 

तुम कहते हो बहुत हसीं हैं सारी  दुनिया वाले ,

दुनियावालों को भी मिलतीं  काश तुम्हारी नज़रें।

 

जब जब भी हस्सास दिलों ने फसल वफ़ा की काटी,

करती रहीं वसूल मुसलसल मालगुजारी नज़रें।

 

प्रेम गाँव की रखती हैं महफ़ूज़ खतौनी खाते

सस्ते में क्योंकर पट पाती ये पटवारी नज़रें।

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