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चला चल राही

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Hindi Poetry

अजीब सफ़र है यह ज़िन्दगी, यह ना जाने क्या सिखाती है,
फूलों से भरी राहों पर, कभी काटों से मुलाकात करवाती है ,

कोई जीता है इसको शान से, कोई बस सांस लेता है
कोई आजमाता है हर पल में खुद को, कोई बस खुदा से फरियाद कहता है ,

खुदा को दिल में रख हमेशा, पर खुद पर तू विश्वास कर,
हर मौसम में सीख जीना, और इस ज़िन्दगी को सलाम कर,
तू तो बस एक राही है, तू तो बस चला चल।।

यह सफ़र मुश्किल भी होगा, कभी तू थक कर गिर भी जायेगा,
कांच के शीशे की तरह, कभी टूट कर भिखर भी जायेगा ,

कभी किसी कुरुक्षेत्र में, तू अर्जुन भी होगा,
अपनों के समक्ष ही खड़ा, तू अकेला भी होगा ,

खुद ही कृषण बन तू, और खुद का ही उद्धार कर,
हर मुश्किल से लड़ तू, हर मुश्किल को स्वीकार कर,
तू तो बस एक राही है, तू तो बस चला चल।।

हर मोड़ पर तुझे नए साथी मिलेंगे, पर कुछ अपने छुट जायेंगे,
कभी ग़म का मौसम होगा, और कभी त्योहार आयेंगे ,

किसी की नन्ही हथेलियों की, किस्मत बनाने का मौका भी मिलेगा,
जो हर वक़्त में तेरे साथ रहे, एक ऐसा साथी अनोखा भी मिलेगा ,

अपने दिल की हर धड़कन को, तू उस राही के नाम कर,
किसी के नन्हे ख्वाबों को, अपनी पल्खें उधार कर,
तू तो बस एक राही है, तू तो बस चला चल ।।

चलते-चलते इस सफ़र मे, एक दिन ऐसा भी आएगा,
यादों को संग लिए, तू साँसों को पीछे छोड़ जायेगा ,

क्या पाया था तुने, क्या खोया था तुने, सब यही रहे जायेगा,
ज़िन्दगी के पनो में, तेरा नाम भी कही ग़ुम हो जायेगा,

अपने दिल की हर तमना, को पूरा तू आज कर,
तेरे अंत से कोई शुरुयात करे, तू कुछ ऐसा काम कर,
तू तो बस एक राही है, तू तो बस चला चल ।।

4 Comments

  1. amit478874 says:

    बहुत ही उम्दा और ख़ूबसूरत कविता..
    आप की ये दो पंक्तियाँ मुझे बेहद पसंद आई…

    १ कभी किसी कुरुक्षेत्र में, तू अर्जुन भी होगा,
    अपनों के समक्ष ही खड़ा, तू अकेला भी होगा ,

    २ अपने दिल की हर तमना, को पूरा तू आज कर,
    तेरे अंत से कोई शुरुयात करे, तू कुछ ऐसा काम कर,
    तू तो बस एक राही है, तू तो बस चला चल ।।

  2. Nishant 'Aaghaaz' Tuteja says:

    धन्यवाद @amit…!!

  3. Vishvnand says:

    रचना और भावार्थ सुन्दर बहुत मन भाये
    हार्दिक बधाई
    “हर मुश्किल से लड़ तू”, लगता है बहुत उचित
    पर “हर मुश्किल का तिरस्कार कर”, लग रहा है अनुचित
    “हर मुश्किल को प्यार से सर कर” शायद लगे ज्यादा उचित
    क्यूंकि सामने की मुश्किलें प्रभु ही सर करने भेजें

    रचना की कल्पना ने ये पंक्तियाँ हैं सुझाईं
    वख्त जो गुजर गया है उसकी न परवाह कर
    हाथ में समय बचा है पल पल उससे प्यार कर
    प्यार का इक रही तू, प्यार बाटता ही चल ….!

  4. Nishant 'Aaghaaz' Tuteja says:

    धन्यवाद @vishv जी,
    आपके सुझाव के लिए और प्रोत्साहन क लिए….!!

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