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न जाने क्यों आज इतना थक गया हूँ मै…?

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Hindi Poetry

एक मामूली इंसान हूँ मै…
दूसरों के दर्द से अंजान हूँ मै…
क्योंकि, आज-कल खुद ही बेहद परेशान हूँ मै…!

क्यों जी रहा हूँ मै..? कैसे जी रहा हूँ मै…?
इसी बात को लेकर हैरान हूँ मै…!

डर डर कर क्यूँ ऐसी ज़िन्दगी जी रहा हूँ मै…
“इंतज़ार” के मैखाने में पैमाने गम के पी रहा हूँ मै…!

इस भाग-दौड़ भरी ज़िन्दगी में न जाने कहा भटक गया हूँ …
शायद अपने आप से ही बहुत उलझ गया हूँ मै…!

लोग कहते है, “ज़िन्दगी हर पल जी भर के जियो…”
जी भर जीने के लिए ही तो पल-पल तरस रहा हूँ मै…!

ज़िन्दगी हर पल मौत की राह पे चलती है,
आज उसी राह पे आगे चल रहा हूँ मै…!

पर ये क्या…? चलते-चलते अचानक रुक गया हूँ मै,
न जाने क्यों आज इतना थक गया हूँ मै…?

– अमित शाह (“मास”)
12/12/12

2 Comments

  1. Vishvnand says:

    भई वाह ….!
    “इंतज़ार” के मैखाने में पैमाने गम के पी रहा हूँ मै…!… बहुत बढ़िया अभिव्यक्ति
    “दिल मांगे More ” के चक्कर में थक कर सो गया हूँ मैं ….!

    रचना बहुत मनभायी
    बधाई

  2. amit478874 says:

    Thanks a lot Sir. Thank you very much for always being supportive. I’m really feeling myself lucky to have suggestions, comments & supports on p4p from you and all such members. I heartly respect this stage of p4p..!! Thanks you everyone,,!! 🙂

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