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पर तुझको अब याद नहीं

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Hindi Poetry, Uncategorized

पर तुझको अब याद नहीं 


पर तुझको अब याद नहीं
कोई तेरा हो सकता था
पर तुझको अब याद नहीं
कोई तुझको खो सकता था
पर तुझको अब याद नहीं
तेरे लिए कोई रो सकता था
पर तुझको अब याद नहीं
कोई था पागल जो सोचा करता
तेरे साथ हसी शामो को
कोई था आशिक जो रोया था
तेरे बिना तन्हा रातो को
कोई था शायर
जिसने तेरे लिए कोई गजल लिखी थी
पर तुझको अब याद नहीं
अब जब सालो बीत गये है
तेरे और मेरे बीच
अब जब दूरी बढ़ी इस कदर
कि बचा नहीं कुछ बीच
अब जब इतना तन्हा हू कि
दिल मे डर सा लगता है
तेरी यादो के आने पर
ये दिल रोने सा लगता है
इस वीराने मे अब भी लेकिन
तेरी यादो के तूफा चलते है
रह रह कर इस दिल मे अब भी
तुझको पाने के अरमा उठते है
अब शायद तू भूल गयी हो
कि तूने भी अश्क बहाए थे
उन रातो को जब मै था तेरा
बाकि सब पराये थे
उन शामो को जब हम दोनो
दूरी पर आहे भरते थे
वो राते वो दिन भी थे जब
हम दोनों इक दूजे पर मरते थे
जब हमने साथ जाना था
एक होने का मतलब
जब तूने पाया था मुझको
अपनी बाहों मे भरकर
वो शामे मुझको अब अक्सर
रह रह कर तडपाती है
वो यादे तेरी जब मुझको
रह रह कर याद आती है
अब तूने शायद आगे बढकर
परिवर्तन स्वीकार किया है
पर मैंने तेरी ही मूरत को
जीवन भर को अंगीकार किया है
तूने सोचा है मुझको एक
भुला बिसरा सा किस्सा
मैंने जाना है तुझको जीवन का
सबसे प्यारा हिस्सा
भूल गयी है तू मुझको अब
भूल साका ना तुझको मै
खेल गयी तू मेरे दिल से
जीत सका ना तुझको मै
जीत सका ना तुझको मै
जीत सका ना तुझको मै
                                         डॉ अजेय त्रिपाठी ” मनन “

2 Comments

  1. Vishvnand says:

    ये यादें तो यादों का घना जंजाल है
    कभी हार कर भी जीत कभी जीत में हार का अहसास है

    रचना भावपूर्ण बहुत मन भायी है

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