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फिर आज दिवाली आई है..

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Hindi Poetry

है जगमग घर घर दियो से , हर ओर खुशहाली छाई है.
इन टिमटिम जलते तारो को ले साथ दिवाली आई है.

घर रोशन गलिया रोशन है ,रोशन मन की गहराई है.
हर अँधियारा उजियारा करते, फिर आज दिवाली आई है.

निर्धन हो या राजा कोई ,जन गन के मन को भाई है .
उंच नीच के भेद मिटाती समभाव दिवाली आई है .

कंही पटाखे कंही पे मेले ,कंही ताश के चलते खेले
रॉकेट ,चरखी हाँथ किसी के ,किसी के हाँथ चटाई है
घट घट फैली लिए रोशनी ,फिर आज दिवाली आई है.

2 Comments

  1. Vishvnand says:

    वाह …दीवाली पर प्यारी सी यह रचना मन को भायी है
    शुभकामनाओं के साथ इस पोस्टिंग पर आपको बधाई है

  2. rupali srivastava says:

    wah wah , tum to poet ho gaye ho.

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