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ऐहसास

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Hindi Poetry

 ऐहसास

…………….
वो अपने  प्रेम-नगर  में रहने का  ऐहसास,
कुछ इस तरह से कराते हैं,
कि उनके दरवाजे पर मच्छरों द्वारा स्वागत होता है,
और ….
उद्धव को चुभने वाले,
वृन्दावन के कांटे याद आते हैं.

*****  हरीश चन्द्र लोहुमी

2 Comments

  1. siddha nath singh says:

    prem nagar kee raah kathin hai kah to gaye buzurg.
    takhto taaz bike is path me ujde mahal aur durg.

  2. Vishvnand says:

    हरीश जी
    वाह वाह बहुत खूब पर क्यूँ इतनी छोटी
    और वो भी मच्छरों की काटी

    जाने क्या क्या वो करते रहते
    अहसास यूं हमें होता रहता है
    क्या प्यार में ऐसा ही
    प्रेमी खाए रहता गोता है …? 🙂

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