« »

मगर हो न पाया तमाशा हमीं से.

0 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 5
Loading...
Uncategorized
उमीदें  रखीं  थी  बहुत जिंदगी  से .
मुलाक़ात ही हो न पायी खुशी  से.
 
अगर  सीख लेते बहुत काम आता 
मगर हो  न  पाया तमाशा हमीं से.
 
दिया भी मुहब्बत ने  इस के सिवा क्या,
मुसलसल गमे दिल,लगातार टीसें.
 
ये थी बात तेरे मेरे दरमियाँ की,
सितमगर इसे कहते क्या हम किसी से  .
 
शहर पी गया है नदी की नदी जब
बचे गाँव कैसे कहो तिश्नगी से.
 
कमी क्या हसीनों की थी कुछ शहर में,
मगर हमको मिलना था बस आप ही से.
 
हुए जा रहे संगदिल शहरवाले,
लगे जा रहे बिल्डिंगों पे हैं शीशे.
 
बड़ा  हो  के भूलेगा सब आदमीयत,
तवक्को  न  रखना बहुत आदमी से. तवक्को -अपेक्षा
 
रहे शादो खुर्रम जहालत में डूबे,
मिले दुःख जहाँ में फ़क़त आगही से. शादो खुर्रम -प्रसन्न और सुखी,जहालत-अज्ञान आगही-ज्ञान

7 Comments

  1. Vishvnand says:

    वाह वाह ,बहुत खूब और खूबसूरत
    हर इक शेर बढ़िया ये मन को बहु भाये
    गर मिले पढ़ने ऐसे तो ना गिला जिन्दगी से …

  2. Harish Chandra Lohumi says:

    बहुत खूब सर !
    कमी क्या हसीनों की थी कुछ शहर में,
    मगर हमको मिलना था बस आप ही से.
    वाह !

  3. kshipra786 says:

    कलम का प्यार हर फुर्सत में खींच लाता है
    पर लफ्ज वाही भाते जो निकले आपकी स्याही से ||

  4. siddha nath singh says:

    mera hardik aabhar samast pasand karne valon ko tasleem ho.

  5. chandan says:

    अगर सीख लेते बहुत काम आता
    मगर हो न पाया तमाशा हमींसे
    ये थी बात तेरे मेरे दरमियाँ की,
    सितमगर इसे कहते क्या हम किसी से

    वाह वाह

  6. siddha nath singh says:

    shukriya chandan ji.

  7. Prem Kumar Shriwastav says:

    बधाई…

Leave a Reply