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पर उनका क्या कीजे जो अक्ल के अंधे है

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Hindi Poetry
एक सवाल से हूँ कर्ब,मुआफी परवरदीगार
सने सर-ता-पा है जो खून से,आप ही के बंदे है?
 
ये मैं दोजख में आ गई, या बुरा है कोई ख्वाब 
अजीब,जो जितना निचे गिर गया, उतना ही वन्दे है |
 
पुरजोर कोशिश है, खलल ना हो आरामपरस्ती में
फिर भी ना जाने किस बोझ से दबे कंधे है |
 
लाख यकता है आप निगाहों की कारीगरी में
पर उनका क्या कीजे जो अक्ल के अंधे है |
 
कोशिशों में हमारी भी कोई कमी न थी

पर आगे वही निकले जो काम के मंदे है |

3 Comments

  1. Vishvnand says:

    वाह वाह बहुत बढ़िया बहुत खूब ….

    कोशिशों में हमारी भी कोई कमी न थी
    पर आगे वही निकले जो काम के मंदे है |

    जैसा दिखता वैसा नहीं, सुखी वही है जो प्रभुप्रेम में बंधे हैं
    सेलेब्रिटी जो दिखावे खुश टीवी में अन्दर से दुखी गंदे हैं

  2. siddha nath singh says:

    कृपया शब्दों में सुधार करें- परवरदीगार की बजाय परवरदिगार और निचे की बजाय नीचे लिखें.
    एक सवाल से हूँ कर्ब इससे क्या कहना चाह रहीं हैं स्पष्ट न हुआ, कर्ब का मतलब बतायेंगीं?

  3. rajdeep bhattacharya says:

    marvelous

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