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“जब प्यार किया तो डरना क्या”…..

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Hindi Poetry

हिना’ लगाकर हाथोमे, कबसे तयार खड़ी है,
क्या फर्क पड़ता है अगर उम्र में वह बड़ी है,
न ‘भुत्तो’ न भविष्यती, ऐसी होनी लगती है,
‘दूल्हा’ तो नया पर, ‘दुल्हन’ पुरानी लगती है,
सभी दुआ मांगते ,कुछ अक्ल दे दे इन्हें “अल्ला”
चूहा फंसा हो दातोंमे, तो कहाँ छोड़ता है “बिल्ला”
“अब्बा” बोले “रब्बा नि’यत, उसकी अच्छी नहीं लगती,
दिल लगा हो ‘गधी’ से, तो ‘परी’ भी अच्छी नहीं लगती,   
अपनी अपनी मर्जी है, हमें तुम्हे है करना क्या,
अनारकली भी कह गयी, “जब प्यार किया तो डरना क्या”….

4 Comments

  1. Vishvnand says:

    वाह क्या बात है, बहुत बढ़िया चुस्त मज़े का वाकिया सुन्दर बयाँ हुआ
    हार्दिक बधाई;
    बात तो बढ़िया है ” जब प्यार किया तो डरना क्या ”
    अजी मत डरो और प्यार करते रहो तुम्हे किसने है रोका
    पर बार बार ये दुहरा हमारे सामे कर हमको डराओ, उसका क्या ? 🙂

    बड़ी देर बाद आपका यहाँ आना हुआ, यारी और प्यार में ये अच्छा है क्या ?

  2. siddha nath singh says:

    magar pyar kiya hai to marna kya?

  3. Harish Chandra Lohumi says:

    अच्छी कही ! कहीं पड़ोसी और पड़ोसन को किसी ने देख तो नहीं लिया 🙂 ……

  4. parminder says:

    खूबसूरती तो देखने वालों की आँखों में होती है, कोई समझा नहीं सकता! हंसी बिखेरती सुन्दर रचना|

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