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कोई अपना न रहा

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Hindi Poetry

अब कुछ पाने की उम्मीद नहीं,

खोने को भी कुछ खास नहीं |

ना रिश्तों की बंदिसे  है अब,

ना किसी के प्यार का बंधन |

किसके लिए  दर्दे जहर पी रहा  हूँ  मैं , 

घुट – घुट के क्यूँ जी रहा हूँ मैं  |

मेरे जीने का अब मकसद क्या है,

खोने के लिए अब बचा ही क्या है |

ना माँ  की ममता  रही, ना रहा भाई – बहन का प्यार |

एक  पल में टूट के बिखर गए वो सारे सपने,

जिन्हें हम सालों से संजोये  चले  आयें थे |

चले थे मंजिल को पाने,

मंजिल का तो पता नहीं,

पर रास्ते में सब कुछ  खो बैठे |

आखिर क्यूँ  जी रहा हूँ मै,

सब कुछ खोने के बाद |

 

जिनसे लगायी थी उम्मीद अपने होने की,

वो तो गैरो से भी बदत्तर निकले |

कौन जनता था, जीवन पथ में

ऐसा भी मोड़  आएगा |

अपने पराये बन बैठेंगे,

पराये अपना कहलाएँगे |

सोचा था करूँगा कुछ खास, इन अपनों के लिए,

पर कुछ करने  से पहले ही,

ये पराये बन बैठे |

जाने अनजाने में वो भी  बहुत कुछ खो बैठे, 

और हम भी कुछ पा ना सके |

आखिर क्यूँ  जी रहा हूँ मै,

सब कुछ खोने के बाद |

 

कोई क्यूँ बिना सच जाने,

बरसो पुराने रिश्ते एक पल में तोड़  जाते है, 

रिश्तों की बस एक मीठी याद  छोर जाते है | 

क्यूँ किसी के किये एहसानों   को क्षण   में  भूल जाते है | 

उन रिश्तों के अपनापन  को,

इतनी जल्दी कैसे तोड़ जाते है |

अभी भी उम्मीद लगाये बैठे है-

कुछ रिश्ते जुड़ जाने की,

कुछ अपनों का प्यार पाने की |  

आखिर क्यूँ  जी रहा हूँ मै,

सब कुछ खोने के बाद |

 

6 Comments

  1. dr.o.p.billore says:

    जिनसे लगायी थी उम्मीद अपने होने की,
    वो तो गैरो से भी बदत्तर निकले |…….
    ………………………………….
    सोचा था करूँगा कुछ खास, इन अपनों के लिए,
    पर कुछ करने से पहले ही,
    ये पराये बन बैठे |
    उत्कृष्ट रचना ,बहुत बहुत बधाई |रिश्तों में अपनापन टटोलती रचना ने अनेक प्रश्न उपस्थित किये हैं

  2. U.M.Sahai says:

    अत्यंत भाव-भीनी रचना, बधाई, धीरज जी.

  3. Vishvnand says:

    रचना बहुत सुन्दर लिखी हुई
    भाव भीनी ह्रदय स्पर्शी
    हार्दिक बधाई

    पर लगता है रचना बहुत गलत mood में लिखी गयी है
    कोई गलत बहकते विचारों और भावनाओं में उभरी है
    क्यूंकि माँ बाप अपने किसी बेटे को कभी भी पराया नहीं समझ सकते हैं
    या तो बेटे से कुछ बहुत भारी गलती हुई है जिसकी सज़ा वो भुगत रहे है
    या बेटा ही कुछ गलतफहमी का शिकार है जिससे उसे ये ख़याल आ रहे हैं
    और बेटे को उनके पास जा कर उनसे माफी मांगने की जरूरत है

  4. amit478874 says:

    Vishvnand सरजी से पूर्ण सहमत हु.. शायद काफी नादुरस्त समय में यह रचना लिखी गयी है एसा लग रहा है. पर कुछ भी कहे, है बहुत ही सुन्दर और भाव भीनी..! यूँही लिखते रहे और थोड़े खुश हो कर लिखे जनाब, आप के कुछ और नगमों का हमें इंतज़ार रहेगा..! 🙂

  5. Abhishek Banerjee says:

    teri shayari ki kya tarif karoo, alfaas nahi milrahe.
    duniya ki saari sites dekhi, per saare phool yahi khilrahe.

  6. parminder says:

    बहुत भाव-भीनी है आपकी कविता, पर विश्व जी की बात से पूर्णतया सहमत हूँ, कोई माता-पिता बच्चों को पराया समझ ही नहीं सकते| जब ह्रदय छलनी होता है तो दर्द अक्सर सोच की दिशा बदल देता है, पर बड़ों के आगे नतमस्तक हो कर क्षमा मांग लेने से कभी कोई छोटा नहीं होता, गलती किसी की भी हो, क्या फर्क पढता है!

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