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हादसे भूल जाते हैं

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हादसे भूल जाते हैं…..बस कुछ निशानियाँ कहानियाँ बयाँ करती हैं….,

दूर कितनी हैं अभी मंजिल…..यह रास्तो की विरानियाँ बयाँ करती हैं…..,,

दूर कर दिया सबकी आँखों से अँधेरा…..उस रात ने सजा चाँद सितारें……,

मगर कितना सुकून था उस अँधेरे में….यह बस जुगनू की तनहाइयाँ बयाँ करती हैं….!!

2 Comments

  1. parminder says:

    मगर कितना सुकून था उस अँधेरे में….यह बस जुगनू की तनहाइयाँ बयाँ करती हैं….!!
    सुन्दर अभिव्यक्ति है| उदासी और खालीपन हर पंक्ति में झलक रहा है|

  2. Nishant Aahgaaz says:

    धन्यवाद परमिंदर जी…!!

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