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आओ मिलकर आज एक नया “भारत” बनाए…

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Hindi Poetry

आओ मिलकर आज
एक नया “भारत” बनाए…!

टूट गए वह सारे सपने,
जो कभी थे वह सारे अपने…
अब भूल भी जाओ
उन सारे सपनों को यारों…
आओ आज फिर
कुछ नए सपने सजाएं…

आओ मिलकर आज
एक नया “भारत” बनाए…!

“आज़ादी” तो हमें मिल गयी कब की उनसे,
“गुलाम” थे हम जिन गोरों के…
मगर आज भी हम “गुलाम” है,
देश के ही कुछ “चोरों” के…

ठाठ जमाये बैठे है वे,
देश के उन सर्वोच्च पदों पे…
यूँ तो बेच के बैठे है वे,
सारी “अकल” अपनी…
बैच न डाले कल कहीं,
हमारे प्यारे “हिन्दुस्तान” को…

इसीलिए कहते है हम यारों,
जल्द से जल्द सावधान हो जाओ..
अब वक़्त आ गया है “प्रहार” का,
उनके नापाक इरादों पे…

आओ अब हम उनको
उनकी औकात दिखाए…
आओ मिलकर आज
एक नया “भारत” बनाए…

याद करो उस “बलिदान” को,
जो दिया था देश के लिए
महात्मा गाँधी और दुसरे कई “अनमोल रत्नों” ने…

याद करो उस “खून” को,
जो बहाया था देश के लिए,
आज़ाद, भगत सिंह और सुखदेव जैसे
कई सारे “शहीदों” ने…

आज वक़्त आ गया है
फिर कुछ “बदलाव” का…
इस देश से “भ्रस्टाचार” को
हमेशा के लिए मिटाने का…

आज मौका दिया है “अन्नाजी” ने हमें,
तो आओ देश के लिए
आज हम भी कुछ बलिदान दे…
आज हम भी खून की कुछ बूंदे बहाए…

अरे यारों…अब भी वक़्त ख़त्म नहीं हुआ,
जल्द से जल्द अब जाग जाओ…
कही फिरसे
थोड़ी देर न हो जाए…
आओ मिलकर आज
एक नया “भारत” बनाए…!

आज फिरसे वक़्त आया है
देशवासियों को यह “एहसास” दिलाने का,
आओ आज एक चिंगारी फिरसे जलाए…

इस “कविता” को इतनी फैलाए,
की हर इंसान देश का यह बोल उठे,

“चलो हम मिलकर,
हिन्दुस्तान का आने वाला हर एक कल
ढेर सारी खुशियों से सजाए…
आओ हम अपने कल को
सुनहरा बनाए…”

आओ मिलकर आज
एक नया “भारत” बनाए…!

Jai Hind… 🙂

– Amit T. Shah (Mas)
15th September 2012

3 Comments

  1. Vishvnand says:

    सुन्दर अर्थपूर्ण जोशीली रचना
    काफी हद तक दर्शाती आज की स्तिथि
    और देश प्रेमी हताश जनता की सुलग रही अंतर्भावना
    रचना के लिए बधाई और संवेदना पूर्ण सद्भावना

  2. Ashant says:

    What a progressive poet. The poet is real ‘Desh Bhagat’. Long live your thoughts. Wish you keep on inspiring Indian people.

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