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जीवन हो सफल

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Hindi Poetry

नवल धवल, पुरुषार्थ प्रबल
खिले लक्ष्य कमल मिलता रहे हल

हर डगर-डगर बढ चले हो चरण
खुशिया करती जीवन का वरण
हो स्वप्न अटल निखरा हुआ पल

नहीं हो हरण कभी नहीं हो क्षरण
भावो छन्दो का ,नही हो मरण
हो धरा निर्मल,धरातल समतल

आंधी, अंधड़ नही हो पतझड़
हो घुमड़ घुमड़ बारिश की झड़
खलबली हलचल जीवन हो सफल

One Comment

  1. Vishvnand says:

    सुन्दर रचना और मनोकामनाएं
    प्रस्तुति भी बड़ी मनभावनी
    हार्दिक बधाई

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