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पतंग निराली

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Hindi Poetry

सरss  सरss ,सरss  सरss  उड़ी पतंग,

फरss  फरss , फरss  फरss  उड़ी पतंग

लाल बैंगनी हरा पीला,

और सफ़ेद कला नीला

 

जब जब आई छठ दिवाली,

तब तब आई पतंग निराली

नीले आकाश में गोता लगता,

बच्चो के मन को यह खूब भाता

 

पतंग पतंग में होती लड़ाई,

सबकी होती खूब कटाई

बच्चो की टोली लड़ लड़ कर,

करती इसकी खूब लुटाई

बच्चे बूढ़े सबके मन को

यह खूब भाई

 

धीरज कुमार

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