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एक मैं भी वतन के वास्ते, एक तू भी वतन के वास्ते…

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Hindi Poetry

मुझे लगता है अभी वो वक्त है जब सभी समाजसेवी और भ्रष्ट्राचार विरोधी ताकतों को एक साथ खड़े हो जाना चाहिये……और उखाड़ फेंकना चाहिये इन निरंकुश राजनेतिक ताकतों को….. ये वक्त गिले शीकवे , मतभेद और तरीकों में अलगाव का नहीं है, देश रिजल्ट चाहता है ……………….

रह रह कर बस यही ख्याल आता है………….

जीत मिले या हार मिले, बस लड़ने का अधिकार मिले
न चंद सियासी दलालों को शब्दों का व्यापार मि

ले…….मौत मिले या अमरत्व मिले, बस अपना अधिकार मिले
गुनाहगारों को सज़ा भरे बाज़ार मिले…………………….

काँपी तो है इमारतें कई कई बार….
अब जरा ये बुनियादें हिले…………….

मैं मिलूँ तुझसे, तू मिल उससे, यूँ मिले हम सबसे….
जब बात वतन की है तो फिर क्या शीकवे क्या गिले

जब एक है मंजिल तो फिर क्यूँ अलग अलग हो रास्ते
एक मैं भी वतन के वास्ते, एक तू भी वतन के वास्ते…

दिनेश गुप्ता ‘दिन’ [ https://www.facebook.com/dineshguptadin ]

One Comment

  1. Vishvnand says:

    बहुत सुन्दर रचना और कथन
    जोशीला अर्थपूर्ण प्रभावी बयाँ
    रचना के लिए हार्दिक अभिनन्दन

    इन कुर्सी विराजमान भ्रष्टाचारिओं की एवम उनकी फूट डालने की कूट राजनीति की
    साथ मिलकर जब तक हम धज्जी न उड़ायें और उन्हें जमीनदोस्त न करें
    तब तक भारत माँ और माँ के सुपूतों को शान्ति नही मिलेगी ये हम ठान लें

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