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—– / मोहब्बत यादगार बन गई /———-

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Hindi Poetry

रुसवा होकर ही मोहब्बत यादगार बन गई /

वफा की मोहब्बत ने तो कारागार बन गई /

कभी ज़माने ने उनका फ़साना ना सुनाया ,

जब तक की मोहबत्त , ना दागदार बन गई /

छीना है मोहब्बत ने कइयों से सबकुछ ,

कभी मोहब्बत किसी की कर्जदार बन गई /

ज़माने ने कितने ही सितम ढाये है ,

कभी दुनियां मोहब्बत की पहरेदार बन गई /

9 Comments

  1. rajendra sharma "vivek" says:

    Mohabbat par hai damdaar rachanaa

  2. Vishvnand says:

    रचना अच्छी लगी
    बधाई
    रंग बिरंगी मोहब्बत के कई रंग देखे
    पर आज मोहब्बत पैसे की बीमार बन गयी

  3. Harish Chandra Lohumi says:

    छीना मोहब्बत ने कइयों से सबकुछ ,
    कभी मोहब्बत किसी की कर्जदार बन गई.

    वाह ! क्या बात है.

  4. Siddha Nath Singh says:

    छिना को छीना होना चाहिए था,

    • Narayan Singh Chouhan says:

      @Siddha Nath Singh,
      बहुत ही शुक्रिया सिंह साहब ………आशा है मार्गदर्शन इसी तरह मिलता रहेगा

  5. kailash jangid says:

    Dear Bhaiyya,
    Love and violence are two basic rather basal human emotions; whenever triggered by hormonal surge, escape from the clutches of cerebral cortex-the rational mind-are bound to create the delusion & chaos.

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