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तो बता साँसों के साथ मद्धम मद्धम तू रूह में कैसे ना उतरे…!!!

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तेरी खुशबू फैली हुई है कमरे के हर कदम ,हर कोने में,
तो बता साँसों के साथ मद्धम मद्धम तू रूह में कैसे ना उतरे…!!!

बिस्तर पे मौजूद है तेरी निशानियों की सिलवटें अब तक,
तो बता तेरी याद फिर जिस्म को हल्के हल्के क्यों ना कुतरे…!!!

तेरी हंसी को ही तो घूँट भर के पिया था मैंने पानी के बदले ,
तो बता मेरी हंसी से तेरा चेहरा फिर फिजाओं में कैसे ना उभरे….!!!

शीशे में दिखता है तेरा अक्स मेरी परछाई से झांकता सा हर बार ,
तो बता आइना देखने को बारम्बार मासूम दिल क्यूँ ना मचले…..!!!

मोहब्बत की हवाएं जब टकरा रही हैं मुझसे अलग ही अंदाज़ में,
तो बता दिल मोहित होकर बल्लियों क्यों और कैसे ना उछले….!!!!!!!!

7 Comments

  1. mohit says:

    थैंक्स….इट्स रेअल्ली good

  2. rajendra sharma "vivek" says:

    Gahan anubhootiyo se bheengi hui rachanaa

  3. Vishvnand says:

    वाह वाह क्या बात है, बहुत बढिया अंदाज़े बयाँ है
    इस सुन्दर नज़्म को पढ़ इसमें खोने दिल क्यूँ न मचले

    रचना के लिए हार्दिक बधाई

  4. parminder says:

    शीशे में दिखता है तेरा अक्स मेरी परछाई से झांकता सा हर बार ,
    तो बता आइना देखने को बारम्बार मासूम दिल क्यूँ ना मचले…..!!!

    वाह-वाह! हर शेर बहुत खूबसूरत! पढ़ कर आनंद आ गया!

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