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सीखा सबक न कोई दिले बदकिमार ने.

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सीखा सबक न कोई दिले बदकिमार ने.
हैरान रोज़ इसको रखा जीत हार ने. बदकिमार-अनाड़ी खिलाड़ी
 
पहले तो ज़िन्दगी का सलीक़ा न था कोई,
जीना सिखा दिया है तेरे इंतज़ार ने.
 
फिरते तलाशे हक़ में अबस सब हैं  कू ब कू ,
ढंक रूह को रखा है गज़ब के गुबार ने.  तलाशे हक़-सत्य की खोज
 
ये बेरुखी ,हुज़ूर सबब तो बताइये,
कर कौन सी खता दी भला खाक़सार ने.
 
पैसों से तोलते हैं सभी ताल्लुक़ात को,
घर हाट कर दिया है  बिल आखिर बज़ार ने.
 
कारे जहां की फिक्र से फुर्सत ज़रा मिली,
बख्शी जो बेखुदी है  सनम तेरे प्यार ने.  बेखुदी-बेसुध  होना 
 
पिंजरों में बांधते हैं ज़हानत को आप क्यों,
इन पंछियों को दीजे ज़रा पर पसारने.   ज़हानत-मेधा

2 Comments

  1. Gaurav Upreti says:

    Its really awsm…..sir.

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