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धमाचौकड़ी रहे चोर भर और सिपाही सो रिया.

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किसी के sms  में आई हुईं  प्रथम चार लाइनों को आगे बढ़ा कर ये कविता हुई है

मुलाहिजा करें-

गणपति बाप्पा मोरिया.

आखिर ये क्या हो रिया.

महंगाई ने कमर तोड़ दी,

भगत तुम्हारा रो रिया.

चोखे चौकीदार मिले हैं

खुद ही करते चोरियां.

सड़ता है गेंहूँ बारिश में

नहीं मयस्सर बोरियां.

सोये भाग हमारे कैसे

कौन सुनाता लोरियां.

पुतलों जैसे नाच रहे सब

कौन हिलाता डोरियाँ.

धमाचौकड़ी रहे चोर भर

और सिपाही सो रिया.

बहता धन बाहर जनता का

मूंदो अब ये मोरियां.

4 Comments

  1. Vishvnand says:

    वाह वाह
    अति सुन्दर ये प्रभावी रचना
    प्रार्थना जैसी शुक्रिया
    चतुर्थी उनकी पास आयी है
    समझ रहे सब मोरिया

    गणपति बाप्पा मोरिया.
    आखिर ये क्या हो रिया.
    जनता महंगाई से जूझे
    नेता ने सब चोर लिया
    और ये भैय्या भजन करे हैं
    जय मनमोहन सोनिया….

    • Siddha Nath Singh says:

      @Vishvnand, dhanyavad prashansa kee khaatir, but you see no takers!

      • Vishvnand says:

        @Siddha Nath Singh ,
        जो आपने कहा यहाँ है
        इसकी जाने क्या है दवा
        सब अपनी ही रचना में गुल
        मिले कमेन्ट का शुक्रिया
        अन्य रचना पर कमेन्ट ना दें
        sharing का है बोरिया
        ऐसा ही तो होरिया
        गणपति बाप्पा मोरिया … 🙂

  2. Digvijay Gupta says:

    मज़ा आ गया इतनी अच्छी कविता पढ़ कर , बहुत बधाई !

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