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भाव नहीं हो अंतरमन में , तो झूठा प्यार जताना मत.

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भाव नहीं हो अंतरमन में , तो झूठा प्यार जताना मत .

भाव नहीं हो अंतरमन में , तो झूठा प्यार जताना मत.
निभा सको तो नयन मिलाना ,कहने को हाथ बढ़ाना मत.

रंग रूप के भले बुरे के ,अगड़े पिछड़े भातिं भातिं के,
धन दौलत के उंच नीच के,सच्चे झूठे जाति-पाति के,
आगे पीछे ऊपर नीचे,पहने रहते कितने मुखड़े,
ओढ़े रहते नकली चादर,होते रहते टुकडे टुकडे.
बंटते बंटते कटते कटते,खुद अपने ही को भूल गए,
इतने झूठे मकडजाल में,एक और झूठ बढ़ाना मत.
भाव नहीं हो अंतरमन में , तो झूठा प्यार जताना मत.

तक तक कर के कोई चातक,मिटता है तो मिट जाने दे.
लौ पर जलता है परवाना,जलता है तो जल जाने दे,
सरसिजदल में मरता भँवरा ,,मरता है तो मर जाने दे.
तेरी पीड़ा मेरी ऑंखें ,भर आती हैं भर आने दे.
मेरा मन रखने की खातिर,अपने मन में गांठ लगाकर,
आवरणों आभरणों से तुम,अपने उद्गार सजाना मत.
भाव नहीं हो अंतरमन में , तो झूठा प्यार जताना मत .

उल्लू रोते रह जाते हैं,पर उषा परी इठलाती है.
चिड़ियों का क्रंदन सुनकर कब,संध्या रानी भरमाती है,
बंदर की खों खों सुनकर कब,बाघों ने रोका गर्जन है.
बस एक आक के झड़ने से,कभी रूका बसंत यौवन है.
प्रणय निवेदन पाओ कितने,बेशक सरे इंकार करो,
महके ना स्पंदन सांसों का,तो अधरों से मुस्काना मत.
भाव नहीं हो अंतरमन में , तो झूठा प्यार जताना मत .

– मनोज भारत

6 Comments

  1. Vishvnand says:

    वाह वाह
    बहुत सुन्दर रचना
    अर्थपूर्ण और अति मन भावन
    हार्दिक अभिनन्दन

    प्रलोभनों पैसों के झांसे भेड़ीओं को मत देना मत
    देश के भ्रष्टों बेईमानों को शिक्षा दे बिन रहना मत
    देश में अब तो बन ही रहा है सारी जनता का ये मत ….!

  2. Dhiraj Kumar says:

    बहुत ही अच्छा ..

  3. rajendra sharma "vivek" says:

    Sundar rachanaa rachate rahanaa
    geet madhumay seenchate rahanaa
    neh bhare muktak doho kabhi bhul paanaa mat

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