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वाह !! रे रिश्तेदार !! (भाग-3)

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Hindi Poetry

 रिश्तेदारी के जहर से मौत न आती,

उसमे भी मिलावट की बू है आती |

 

वो मिलावट है झूठे अपनापन की |

वो मिलावट है झूठे अपनापन की |

 

हमें लगती है बड़ी फनकारी,

अपने रिश्तेदारों की ये रिश्तेदारी |

जय हो !!!   रिश्तेदार,  जय हो !! जय हो!!

धीरज कुमार

3 Comments

  1. rajendra sharma "vivek" says:

    Dheeraj ji teeno kavitaao me rishtedaaro par tagadaa vyangy kiyaa

  2. Vishvnand says:

    वाह !! रे रिश्तेदार !! तीन भाग करने की बात समझ न आयी
    सब में सब रिश्तेदारों की करना ऐसी धुलाई उचित नही लगी भाई
    भूल मत जाओ तुम खुद ही कितनो के रिश्तेदार हो क्या चलेगी तुम्हे ऐसी उपाधि
    अपना जीवन माँ बाप रिश्तदारों और दोस्तों के प्यार से ही उभरता हैं भले इनमे रिश्तेदार अपवाद हों कोई कोई…. 🙂

    • Dhiraj Kumar says:

      @Vishvnand, जो उस तरह के रिश्तेदार है ye vyangay उनके लिए है .. कुछ bari कविता थी इस लिए 3 part kar di ..

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