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वाह !! रे रिश्तेदार !! (भाग-1)

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Hindi Poetry

वाह !! रे  रिश्तेदार !!

 

हमे लगती है बड़ी फनकारी,

अपने रिश्तेदारों की ये रिश्तेदारी |

 

हर बार हमें महंगी पड़ती है, 

इन रिश्तेदारों की ये रिश्तेदारी |

 

हर समस्या का जड़ है,

ये  रिश्तेदारी |

 

एक बात की बाँध लो गांठ –

बुरे वक़्त में जो देता न  साथ,

वो  होता है  रिश्तेदार |

 

शादी हो या हो श्राध, 

इन्हें चाहिए भोजन और आराम |

आते है दुःख जताने को, 

दुःख देकर चले जाते है,

यही तो रिश्तेदार कहलाते है |

 

हमारी खुशियों से इन्हें जलन, है होती, 

प्रगति तो इनसे सहन न होती |

वाह !! रे रिश्तेदार !!

क्या,  यही है तेरी रिश्तेदारी  ?

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