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आज की ये गुलामी

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Hindi Poetry

      आज की ये गुलामी

आज हम आजाद होते हुए भी गुलाम हैं |

कल तक गोरे लुटते थे ,

अब काले लुटते हैं |

कल तक गैरों  के गुलाम थे ,

अब अपनों के गुलाम हैं |

आज की ये गुलामी ,  एक गाँधी से नहीं जाने वाली

ये गुलामी की मोटी जंजीर , ऐसे नहीं टूटने वाली |

पुरे देश  को बनना होगा गाँधी ,

तब जा के आएगी बदलाव की आंधी | 

धीरज कुमार

2 Comments

  1. Vishvnand says:

    एक गांधी से आपका क्या मतलब है ?
    इंदिरा गांधी, राजीव गाँधी, सोनिया गाँधी या राजीव गांधी 🙂

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