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माँ कहती थी

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Hindi Poetry

जिन अंधेरों  में  वर्षो से मेरी माँ को ,

घुट – घुट कर  जीने की मज़बूरी  थी |

बेरहम वक़्त को मौत भी उन्हें ,

उन्ही अंधेरों में देनी थी |

फिर भी मेरी माँ कहती थी –

दुःख की घड़ी के बाद ,  सुख की आती ही, आती है ,

एक छोटा सा दिया अँधेरा कोसो  दूर भगाती  है |

 

अंधेरों में जन्म लिए हम ,

अंधेरो में ही कटा हमारा बचपन |

सोचा  था बहुत जल्द मिट जायेगा ये अँधेरा ,

पर अब  तक अँधेरा  ही अँधेरा है |

अँधेरे बचपन के दिन भी बड़े हसीन थे ,

माँ का प्यार था , था भाई – बहन  के झगड़ें  |

माँ कहती थी –

बेटा तुम बनना दीपक

और बेटी तुम बनना ज्योति |

फिर मिलकर , कोसो दूर भगाना  , इस अंधेरो को |

 

उन अंधेरों में भी , माँ के बनाये खानों की

बात निराली थी |

उनके डांट फटकार में भी

अपनापन की पावन खुशबू आती थी |

सूरज ढ़लते ही घर आ जाने की ,

जो हिदयात थी |

बंदिसे लगती  थी तब  वो सब ,

अब वो बंदिसे न होते हुए भी ,

हम क्यूँ बंदी हैं ?

माँ कहती थी –

संघर्ष की एक मिशाल बनने को ,

अंधेरों  में रहकर , अँधेरा दूर भगाने  को |

कहती थी –

दुःख की घड़ी के बाद ,  सुख की आती ही, आती है ,

एक छोटा सा दिया अँधेरा कोसो  दूर भगाती  है |

पर , मैं पूछता हूँ , माँ से –

क्या , वो सुख की घड़ी , दुःख के  जख्म भर  पाती हैं ?

क्या , उजाले  आ जाने से ,

अँधेरे  की काली याद मिट जाती है ?

नहीं  माँ  |

गरीबी की वो अँधेरी राते ,

फूस के घर के छत से टपकती वो बारिस की बुँदे  ,

ठंड से ठिटूरती वो राते ,

भूले से ना  भूली जाएँगी |

आँखों के आंसू ,

रोके , ना रोकी जाएँगी |

अब तक तुम कहती थी |

अब मैं कहता हूँ –

तुम्हारी याद , अँधेरा छंटने के भी बाद ,

आएँगी और आके  कानो  में चुपके से कह जाएँगी –

दुःख की घड़ी के बाद ,  सुख की आती ही, आती है ,

एक छोटा सा दिया अँधेरा कोसो  दूर भगाती  है |

माँ कहती थी….  |

 

धीरज कुमार

One Comment

  1. dr.o.p.billore says:

    प्रिय धीरज कुमार ,
    अत्यंत भावुक उदगार , माँ के प्रति दर्शाता है गहरा प्यार |
    कष्ट सहे अनेकों मगर , बच्चों का मनोबल बढ़ाया अपार ||
    माँ बिलकुल ठीक ही कहती थी |
    दुःख के बाद सुख आता ही है |

    सुन्दर रचना खूब बधाई ||

    सुख सदा रहता नहीं तो दुःख का भी अंत है |

    किसी कवि ने बिलकुल ठीक ही कहा है :-
    हेरे भी मिलेंगे नहीं संकट के चिन्ह कहीं ,
    जायेंगे कहाँ के कहाँ सारे विघ्न बाधा पीर |
    बनेगा जगत भर तुम्हारी दया का पात्र ,…………….||

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