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मैं फिर वही कहुँगा

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Hindi Poetry

       मैं फिर वही  कहुँगा

      

जब भी क्लास कोई लेट से जाता ,                                           

टीचर को वो  रास न आता ।

एक तो पुरा घंटा बाहर बिठाता ,

फिर इन्टरनल की वाट लगाता ।

बात बात पे देता है इन्टरनल की धमकी  ,

हमें नहीं पता फिर कैसे पास कर जाती है लड़की ।  

मैं फिर वही  कहुँगा –

लड़कियो का कोई जवाब नहीं  ,

उनसे अपना कोई सवाल नहीं  ।

 

 इन्हें कांसेप्ट नाम की कोई चीज़ न आती ,

रट रट के है काम चलाती ।

फिर भी होल क्लास अपने  को कंसंट्रेट दिखाती ,

भले क्लास के अंत तक उन्हें कुछ समझ न आती ।

क्लास में होती है ये फ्लौपर ,

बट सेम में हो जाती है टॉपर ।

मैं फिर वही  कहुँगा –

लड़कियो का कोई जवाब नहीं ,

उनसे अपना कोई सवाल नहीं ।

 

लडको  को डेवीएट  करना कोई इनसे सीखे ,

    सीखना है तो

टीचर  को इम्प्रेस करना कोई इनसे सीखे ।

झूठ  को सच बना के परोसना कोई इनसे सीखे ,

    सीखना है तो

बात बात पे शक  करना कोई इनसे सीखे ।

मैं फिर वही  कहुँगा –

लड़कियो का कोई जवाब नहीं ,

उनसे अपना कोई सवाल नहीं ।

 

          ये सोती पूरी क्लास है 

एंड चैट  करती पुरी रात है

हमें नहीं पता की इनमे कुछ ख़ास है ,

सबकुछ लगता बकवास है ,

बट रट्टा लगाने में पास है ।

मैं फिर वही  कहुँगा –

लड़कियो का कोई जवाब नहीं ,

उनसे अपना कोई सवाल नहीं ।

 

यूँ तो चैट लड़के  भी  सारी रात करते है  ,

 झील  के  किनारे एकुअल  टाइम बर्बाद करते है ।

बट लड़किया टॉप करती है

एंड लड़के फ्लॉप  करते है ।

मैं फिर वही  कहुँगा –

लड़कियो का कोई जवाब नहीं ,

उनसे अपना कोई सवाल नहीं ।

 

फुटे उनके नसीब है ,

जो लड़के होते इनके  करीब है ।

 जल्द ही बनते वो फकीर है,          

 जो लड़कियो को समझते नसीब है ।

इनके शौपिंग  में लड़के कंगाल होते है,

बट  ये  मालामाल होती है , मालामाल होती है ।

मैं फिर वही  कहुँगा –

लड़कियो का कोई जवाब नहीं ,

उनसे अपना कोई सवाल नहीं ।

 

लड़किया कपड़ो की तरह  ब्वायफ्रेंड चेंज करती है ,

कभी टाउन्सिप (market)  तो कभी शेरे(hotel) में ,

          ब्वायफ्रेंड   का पैसा खर्च करती है ।

फिर भी लड़के  इनसे मिलने  का  टाइम लिया करते है ,  

इनकी  एक अदा  पे मर मिटने को तैयार रहते है ।

मैं फिर वही  कहुँगा –

लड़कियो का कोई जवाब नहीं ,

उनसे अपना कोई सवाल नहीं ।

                    

2 Comments

  1. Vishvnand says:

    रचना में और आप जो कहना चाहते हैं
    दोनों में बहुत refinement और सुधार की जरूरत है
    सही दर्जे पर आने के लिए, ये मेरी खुद की राय है ….

    • Dhiraj Kumar says:

      @Vishvnand, ये कविता
      मैंने सिर्फ मजाक के लिए लिखा है… मै सुधारने की पुरी कोशिस करूँगा

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