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——- /जिद छोडो भी /—–

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Hindi Poetry

सावन बीते /

सुने रीते /

तुम क्या जानो ,

कैसे जीते //

किया था वादा /

रहा वो आधा /

कम तुने आँका ,

प्यार था ज्यादा //

अब आओ भी /

जिद छोडो भी /

मै हूँ मंजिल ,

राह मोड़ो भी //

5 Comments

  1. Vishvnand says:

    वाह वाह बहुत खूब
    रचना मन भायी

    तुम ना जानो मेरी मंजिल
    मुझे मत टोंको
    रास्ता छोड़ो जी
    आना हो तो आओ साथ
    चलें पास अन्ना के
    जंतर मंतर जी ………

  2. bhumika dwivedi says:

    aapki kavitaayen bahot hi touching hain.. sabhi pasand aayi hain mujh kareeb..

  3. kailash jangid says:

    whether, got her by the much craved turn?

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