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तुमको देखे हुए एक ज़माना बीत गया…………

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Anthology 2013 Entries

तुमको देखे हुए एक ज़माना बीत गया…………

 

तुमको देखे हुए एक ज़माना बीत गया

बिन तेरे हर मौसम ही तो रीत गया

हर दिवाली रही अँधेरी, हर होली बेरंग

पल भर में टूट गए, सवप्न सलोने जो देखे संग संग

कितने अपने रूठ गए, एक तुमको मनाने में

कितने नाते टूटे गए, एक रिश्ते अनजाने में

रात के अंतिम पहर जवाँ हुए जो ख्वाब सारे

सुबह होते ही टूट गए सिरहाने में…………

 

बिन तेरे कितने दिन यूँही ढले

बिन तेरे हर रात काली रही

हम जलते रहे प्रेम-अगन में

तेरी हर रात दिवाली रही

 

ख्वाब भी अब चुनकर देखता हूँ मैं

आँसुओं को पलकों में समेटता हूँ मैं

तुम नहीं मगर तेरे होने का अहसास,

अब भी मेरी रूहों में बाकी है…….

जिस्म को चंद साँसों में लपेटता हूँ मैं

 

हाथों में कलम है और होठों पर गीत है

शब्दों में बेरुखी है मगर सुरों में संगीत है

हर मौसम ही तो रीत है, ये कैसी प्रीत है

हार कहूँ इसे या बस यही जीत है……..

 

  तुमको देखे हुए एक ज़माना बीत गया………..बिन तेरे हर मौसम ही तो रीत गया……..

 

दिनेश गुप्ता ‘दिन’   [ https://www.facebook.com/dineshguptadin]

2 Comments

  1. kshipra786 says:

    good one

  2. Vishvnand says:

    सुन्दर रचना में मन की बातें
    प्यार में प्यार से ही शिकायतें
    बहुत मन भायी हकीकतें

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